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Thursday, September 28, 2017

ज़िन्दगी, मिल मुझे किसी मोड़ पर..!!

ज़िन्दगी तुझे मै ढूंढती हूँ,
तू मिल मुझे किसी मोड़ पर,
कहते है सब मेरे पास थी तू,
लगता चली गयी मुझको छोड़कर,
अफ़सोस में हूँ मै, हैरान भी,
क्यों चली गयी मुझको छोड़कर,
चाहा तो तुझको बहुत किया,
फिर जाने क्या हुई है खता,
रिश्ता है तुझसे गहरा मेरा,
एक बार आके मिल तो ले,
मेरी दोस्त बन मेरे साथ रह,
तेरे रंगों से अनभिज्ञ हूँ मै,
मुझे अपने रंगों में भिगो तो दे,
तुझे जी सकू संग मर सकू,
इतना करम तो कर ही दे,
रात है कारी बड़ी ये,
तू बन के सवेरा मुझमे उतर,
ज़िन्दगी तुझे मै ढूंढती हूँ,

तू मिल मुझे किसी मोड़ पर...!!

Monday, April 3, 2017

आहट

दरवाजे पे जो हलकी सी आहट हुई है,
सूखे पत्तों में जो सरसराहट हुई है,
मुझे यूँ लगा जैसे तुम आ गए हो,
हांथों में जैसे की जान आ गयी है,
होठों पे एक अजब मुस्कान आ गयी है,
खुद ही से मै यूँ संवरने लगी हूँ,
अलफ़ाज़ मेरे डगमगाने लगे है,
दिल ये मेरा मेरे बस में नहीं है,
कदम मेरे रोके थामते नहीं है,
दस्तक तुम्हारी ये क्या कर रही है,
दरवाजे पे जो हलकी आहट हुई है...!!

Thursday, December 3, 2015

तु मुझको दर्द भी देजा

तु मुझको दर्द भी देजा,
दवा भी तुम लगा देना,
हो गर गलतियां मुझसे,
सजा भी तुम सुना लेना,
तेरा जो हाथ छोड़ू मैं ,
पकड़ कर तुम बिठा लेना,
गर हूं  नाराज़ मैं तुमसे,
पलट कर तुम मना लेना,
रिश्ते की एहमियत फिर से,
मुझको फ़िर से तुम सिखा देना।।


द्धारा 
(सुचिता यादव)

Wednesday, December 17, 2014

सुकून का मंजर

कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
जबसे तू गया है मेरी नींद खो गयी है,
नैनों मे आँसुओं की लम्बी झड़ी लगी है,
कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
इस दर्द से मेरी भी एक ज़ंग छिड़ गयी है,
दिल मे ना चैन कोई, मेरी नींद खो गयी है,
मेरी खुद की आत्मा अब मुझसे लड़ने लगी है,
कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
कोई नहीं है अब ये अश्‍क़ पोंछने को,
तेरा पता पूछती ये आँखें ताक़ मे खड़ी है,
कैसे तुझे बुलायें, बेइंतेहाँ ये फासले है,
अभी हमें अपने सफ़र तय करने बचे है..!!

By: FIND ME

Wednesday, December 10, 2014

A very inhuman and saddest human made disaster that killed thousands of people in Bhopal on 3rd December 1984.. its been 30 long year have been past but still the justice is awaited. many of our people are still facing the problems...This pain of losing our own person is unbearable that it can't be expressed in words...but as from my heart there are some lines.. RIP to all the people died in the GAS TRAGEDY OF BHOPAL....!!!

मेरे इस खूबसूरत शहर की हालत तो देखो,
जोकि तुमको नजर आती नहीं,
मेरे सनडर से सपनों का घर था ये देखो,
जहाँ अब चीखें सुनी जाती नहीं,
तबाह कर दिया हमें तो इस इंसान ने ही खुद,
इस शहर की आवो हव़ा हमें रास आती नहीं,
हर तरफ शमशान का सा मंजर था छाया,
अब और इस शहर की हालत हमसे देखी जाती नहीं,
उन मुर्दो पर बना लिये है लोगो ने घर देखो,
पर उस दर्द की पीर अब भी इस दिल से जाती नहीं ..!!