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Saturday, July 30, 2011

आज मेरे दिल में....

आज मेरे दिल में....

आज मेरे दिल में एक ख्याल है आया,
जाने दिमाग फिर एक सवाल है ले आया,
क्यों मिल के बिछड़ना जरुरी है यहाँ पे,
क्यों खुद से ही लड़ना जरुरी है यहाँ पे,
क्यूँ अपनी ही आवाज़ मेरे कानो तक नही पहुँच  पाती,
क्यों अकेले से रह गये है हम यहाँ पे,
क्यों ऐसी सजा सा ये जीवन मिला है,
क्यों दिलो दिमाग पे ये अँधेरा घना है,
क्यों सपनो पे चाय है गहरी रात का ये साया,
आज इन ख्वाबों की क्यों बोली लगी है,
आज समय की ना जाने क्यों घडी बंद पड़ी है,
क्यों ऊपर को जाने की एक होड़ सी लगी है,,,क्यूँ??
आज मेरे दिल में एक ख्याल है आया....!!!




Friday, July 15, 2011

उस चाँद के पार चले...


उस चाँद के पार चले...

आओ हम मिल कर उस चाँद के पार चले,
ग्रहण करे उसकी शीतलता,
छोड़ कर अपनी बुराई को बस,
उसकी चांदनी में डूब शीतल हो जाये,
ना हो वहाँ कोई दर्द इस दिल में,
कोई सपनो की होड़ लगायें,
चलो चाँद के उस पार चले जाए,
इतना शांत सा दिखता है वो चाँद,
शांत चित्त और शीतल मन का है प्रतीक,
पर फिर भी उसके चेहरे के भाव क्यों है अजीब,
अक्सर लगता है जैसे कुछ परेशान सा है वो,
पर उसे भी क्या पता कितना है वो खुशनसीब,
उसे देख तो समुन्दर में भी हलचल है,
वो भी तुझे पाने की चाह में,
कर देता है अपने पानी को तेरे करीब,
उसमे भी तुझ तक पहुचने की है चाह पले,
आओ हम मिल कर उस चाँद के पार चले.....!!!