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Tuesday, November 5, 2013

आज थक गये है फिर से..



आज थक गये है फिर से,
बैठना चाहते है किसी पेड़ कि छाया तले,
लेकिन क्यूँ वो छाया भी अब मुझे अब मिल नहीं रही,
बस दौड़ ही क्यूँ बची है ज़िन्दगी में अब मेरी,,
कभी खुद से ही जंग है तो,
कभी औरो से है छिड़ी ,
कभी हम सोचते हुए युही घर से निकल पड़े,
कभी थक के यु गिरे वहाँ कोई था जो थम ले,
आज फिर से उन्ही काँटों से मेरे पैर छिल गए,
जिन्हे तोड़ कर राहों में मेरी फेंका था तुम्ही ने,
आज थक गये है फिर से,
बैठना चाहते है किसी पेड़ कि छाया तले….!!!!

Monday, June 17, 2013

काश .....!!!!





काश किसी से कह पाती,
काश ये घुटन सह पाती,
काश तुम्हे यूँ बतलाती,
काश इन आँखों के आँसू,
निकले हैं कई बार तुम्हे ये दिखलाती,   
काश तुम मेरी ख़ुशी बांटते,  
और मेरी ख़ुशी दुगुनी हो जाती,  
काश मुझे तुम यूँही रोकते,  
काश यूँही मै  रुक जाती,
काश मुझे तुम समझ ही जाते,  
काश तुम्हे मै  समझा पाती,
काश .....!!!!


Wednesday, June 12, 2013

Unknown..



Mere dil ki ehmiyat wo kya smjhenge,
Mere jajbaat hi jb wo majaak me taalte rahe,
Meri baaton ko smjhne ki ummed unse kya rakhun,
Jab wo meri baton ko sare bazaar uchalte rhe..!!

Unknown..



Mere dil ki ehmiyat wo kya smjhenge,
Mere jajbaat hi jb wo majaak me taalte rahe,
Meri baaton ko smjhne ki ummed unse kya rakhun,
Jab wo meri baton ko sare bazaar uchalte rhe..!!