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Wednesday, December 17, 2014

सुकून का मंजर

कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
जबसे तू गया है मेरी नींद खो गयी है,
नैनों मे आँसुओं की लम्बी झड़ी लगी है,
कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
इस दर्द से मेरी भी एक ज़ंग छिड़ गयी है,
दिल मे ना चैन कोई, मेरी नींद खो गयी है,
मेरी खुद की आत्मा अब मुझसे लड़ने लगी है,
कबसे सुकून का मंजर मेरी आँखों मे नहीं है,
कोई नहीं है अब ये अश्‍क़ पोंछने को,
तेरा पता पूछती ये आँखें ताक़ मे खड़ी है,
कैसे तुझे बुलायें, बेइंतेहाँ ये फासले है,
अभी हमें अपने सफ़र तय करने बचे है..!!

By: FIND ME

Wednesday, December 10, 2014

A very inhuman and saddest human made disaster that killed thousands of people in Bhopal on 3rd December 1984.. its been 30 long year have been past but still the justice is awaited. many of our people are still facing the problems...This pain of losing our own person is unbearable that it can't be expressed in words...but as from my heart there are some lines.. RIP to all the people died in the GAS TRAGEDY OF BHOPAL....!!!

मेरे इस खूबसूरत शहर की हालत तो देखो,
जोकि तुमको नजर आती नहीं,
मेरे सनडर से सपनों का घर था ये देखो,
जहाँ अब चीखें सुनी जाती नहीं,
तबाह कर दिया हमें तो इस इंसान ने ही खुद,
इस शहर की आवो हव़ा हमें रास आती नहीं,
हर तरफ शमशान का सा मंजर था छाया,
अब और इस शहर की हालत हमसे देखी जाती नहीं,
उन मुर्दो पर बना लिये है लोगो ने घर देखो,
पर उस दर्द की पीर अब भी इस दिल से जाती नहीं ..!!


Tuesday, December 9, 2014

कैसे

गर्दिशों मे है तारे मेरे तुझे ये समझाऊ मै कैसे,
दिल मैं है दर्द कितना ये तुझे बताऊ मै कैसे,
अंखों से बहने लगे है आंसु यू बेवजह,
इन अंसुओं की तकलीफ तुझे दिखाऊ मै कैसे,
तुझसे ये दूरियां है बेबसी मेरी,
तेरे इस प्यार को अपने दिल से यूँही मिटाऊ मै कैसे,
मेरे हर ख्वाब है टूटे किसी हल्के काँच के जैसे,
इन टूटे हुए ख्वाबों को तुझसे रूबरू कराऊ तो कैसे,
मेरा दिल तडप कर दे रहा है आवाज़ तुझे,
इन दूरियों के पार ये आवाज़ सुनाऊ मै कैसे.
गर्दिशों मे है तारे मेरे तुझे ये समझाऊ मै कैसे,
दिल मैं है दर्द कितना ये तुझे बताऊ मै कैसे..!!!

Friday, November 21, 2014

तेरे आने से मेरा ये जहाँ रोशन है,
ये जमीन तो जमीन तो वो आसमां रोशन है,
तेरे कदमों की आहट जो इस चौखट ने सुनी है,
मेरे मुहल्ले का हर मक़ान रोशन है,
तूने जो ये इश्क़ की लौ मेरे दिल मे जलाई थी,
उस एक शमा से मेरा जेहेन-ओ-तमाम रोशन है..!!



द्वारा:
सुचिता यादव (Find me)

Saturday, November 15, 2014

आइना

मैने अपनी आँखों को कभी रोते हुए देखा नहीं,
मैने पूछा आइने से क्या तूने देखा है कभी,
आइना पलट के मुझ पर हॅंसने लगा यूँही बोला,

तुझ को तुझसे भी बेहतर मैने जाना है बिलकुल सही..!!

Monday, November 3, 2014

हमको भी यूं प्यार हुआ था

एक हँसी इक़रार हुआ था,
हमको भी यूं प्यार हुआ था
अंधेरे थे तब जीवन में,
फिर रोशन घर बार हुआ था,
खुशियों मे कोई कमी नहीं थी,
पर आँसुओं का भी दीदार हुआ था,
रब से कुछ माँगा जो मैने,
पहली दुआं वो मेरा यार हुआ था,
मुह से लफ्ज़ नहीं निकले थे,
पर आँखों मे पत्राचार हुआ था,
एक हसीन इकरार हुआ था,

और हमको भी यूं प्यार हुआ था …!!

Monday, October 20, 2014

वादें

किये थे जो वादें थे तुमसे उन्हे निभा ना सकूँगी,
कही थे जो बातें थी तुमसे उन्हे भुला ना सकूँगी,
भले जो मानो तो बेवफा मैं सही,
दिया जो दिल था तुम्हे उसे मैं वापस पा ना सकूँगी,
तेरे इन हाथों की छुअन मुझे याद है अब तक,
तेरी उन बातों की कशिश जो मेरे साथ है अब तक,
तेरी वो नादानियाँ वो लड़ना तेरी यादें जो पास है अब तक,
तू जो भी कह ले पर सच है तुजे भुला ना सकूँगी,
पर किये जो वादें थे तुमसे उन्हे निभा ना सकूँगी,
तुझे यू छोड़ के राह मे मैं तो जी ना सकूँगी,
तू जो गया है तो तुझे भी रुकने को मैं ना कहूँगी,
मेरे जाने से ये जो तेरी जिंदगी थमी है,
मेरा है वादा ये फिर से बेहने लगेगी..
इस दर्द को अपने दिल में सहेज लुंगी ,
पर किये जो वादें तुमसे उन्हे निभा ना सकूँगी..!!


From: Find Me...

Saturday, October 11, 2014

जिक्र

यूं कुछ तेरा जिक्र ही ऐसा हुआ जो,
की यादों मे कुछ पल ताज़ा होने लगे यू,
कुछ साँवली सी झलकियां आँखों से गुजरने लगी,
कुछ देर के लिये मस्तिष्क़ पे सोच का बादल गहराने लगे,
सोच की नदियाँ मीलों दूर तक बहने लगी,
कुछ मीठी बातें परचम बनकर लेहराने लगी,
आँखों से समंदर बाँध तोड़ क़र बेहने लगा यूं,
आज पूरा चाँद भी अधूरा लगने लगा यूं,
कुछ तेरा जिक्र ही ऐसा हुआ जो …..!!



सुचिता

Monday, July 7, 2014

ज़िंदगी



ज़िंदगी की राह मे आज  ठोकर है लगी,
लोगों ने माना सीख है मैने माना ज़िंदगी,
वो ज़िंदगी क्या ज़िंदगी जो अविरल पानी सी बही,
ज़िंदगी तो वो है जो कांटों के पथ से है सजी,
कांटों के चुभने से भी ये कभी भी ना रुकी,
कोई भी ग़म जो आये, पीछे खीच सकता नहीं
घड़ी के हाथों के तले वक़्त को बांधे चली,
साथी बने और वो छूटे फिर भी ये बढ़ती रही,
राह का पथिक मान कर सबको पीछे छोड़ा यूही,
आज इसने सिखला दिया क्या है रास्ता सही,
कौन तेरा साथी रहा था, और कौन वो जो था ही नहीं,
बढ़ते कदम ने ज़िंदगी के मुझको सिखलाया यही,
बढ़ती रहू इस ज़िंदगी के पथ पे बिना रुके हुए कहीं,
ज़िदगी की शान तो गतिरोधकों से ही है बनी…!!

Sunday, April 6, 2014

अलक से फ़लक तक

अलक से फ़लक तक बस यूं ही चलते रहे,
तेरा हाथ थामे हुए बस बढ़ते गये,
वो तुझ पर भरोसा ही था जो पूछा नहीं कुछ,
तेरे कदमो के साथ कदम बढ़ते गये,
राह मे एक वक़्त जब हाथ छूटा,
तब हमने पीछे मुड के जो देखा,
ना तुम दिखे ना वो तुम्हारा हाथ था,
ना वो कदम थे ना वो तुम्हारा साथ था,
ठिठक गये हम ये सोचकर की कितनी दूर गये हैं,
अब ना तो मंज़िल पता था ना ठिकाना रहा था,
अपनी गलतियों पे बस यूँही पछताना बचा था,
काश ना वो हाथ थामते ना वो साथ मांगते,
अब तो ये हाथ खुदा से बस ये दुआ मांगते,
ना ऐसा कोई हाथ देना ना ऐसा कोई साथ देना,
जो अकेला छोड़ दे ना ऐसा कोई रेहमतगार देना,
अब जरूरत हो कभी भी एक साथ की तो,
बस एक तू ही एक मेरा हाथ थाम लेना ….!!