There was an error in this gadget

Tuesday, February 25, 2014

मेरी आशिकी...!!

ये रूह मे छनती रही,

छुपती रही निकलती रही,

धूप मे पिघलती रही,

इन्ही आशाओ की डोर थामे,

मेरी आशिकी चलती रही,

सामने जब तक वो रहे,

एहसास भी नासमझ थे,

दूर हमसे जब हुए,

तब ये शाम भी ढलने लगी,

एक होने की बेपरवाह तमन्नाओ के तले,

तेरी दूरियां खलती रही,

तेरी जुदाई के दर्द मे भी,

मुश्किलों से टकराते हुए,

ये बेबाक़ सी बढ़ती रही,

इन्ही आशाओ की डोर थामे,

मेरी आशिकी चलती रही..!!

रेत



रेत सा फिसला है आज वक्त ऐसे,
थम गए हो सारे यूही लम्हात जैसे,
जज्बात के फ़ीके पड़े है रंग सारे,
जहन मे टूटे पड़े हो ख्वाब जैसे,
परछाइयां यूँ रूठकर जाने लगी है,
मेरे चाँद को लग गया ये ग्रहण कैसे,
आज सवालों की लग गयी है झडी दिल मे,
क्यूँ जवाबों मे उलझे है ये सावल ऐसे,
रात ने खामोसी की मोहर यू लगायी,
की टूट कर बिखर गए मेरे अल्फाज़ ऐसे …!!